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shiv puran : तिल दान का विशेष महत्व

माघ महीने की शुरुवात हो चुकी है जो भी 24 फ़रवरी 2024 तक रहेगा और इस shiv puran में तिल दान 

का विशेष महत्व बताया गया है ।

षटतिला एकादशी माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनायी जायेगी जो की भगवान विष्णु को 

समर्पित और अनन्य प्रिय है ।

इस माह में पितरों को तिल अर्पण करने का भी विशेष महत्व है ।

इस दिन तिल दान का विशेष महत्व भी है मान्यता अनुसार षटतिला एकादशी के दिन व्रत पारण के समय 

तिल दान करने से विष्णुलोक या वैकुण्ठलोक में स्थान मिलता है ।

वैसे तो यह पूरा माघ का महीना ही अति शुभ माना जाता है तिल दान के लिए तो आइये जानते है विभिन्न 

तिथियों के बारे में जिसपर तिल दान करना अति शुभ माना जाता है और उनके पौराणिक उल्लेखों के बारे में 

विस्तार से 



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तिल दान का महत्व :

तिल दान के महत्व के बारे में ब्रह्मवैवर्त पुराण और देवी भागवतपुराण में बताया गया है कि -

जो भारत वर्ष में ब्राह्मण को माघ माह में तिल का दान करता है उसे उसके तिल के दान में दिये हुए दानों के बराबर वर्षों तक विष्णुलोक में स्थान और सम्मान मिलता है ।

उसके बाद उत्तम योनि में जन्म पाकर चिरंजीवी होकर सुख भोगता है ।

अगर तिल का दान ताँबे के पात्र में रख कर किया जाए तो इससे दोगुना फल प्राप्त होता है ।

( ब्रह्मवैवर्त पुराण , प्रकृतिखंड , अध्याय 27

तथा देवी भागवतपुराण , स्कंध 09 , अध्याय 30 )



शिव पुराण में तिल दान का महत्व (shiv puran) :

शिव पुराण के अनुसार तिल दान बल प्रदान करता है और उसमें वृद्धि लाता है और मृत्यु निवारक भी माना जाता है ।

“ तिल दान बलार्थ हि सदा मृत्युंजय विदु “


महाभारत में तिल दान का महत्व :

महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार जो तिल ब्रह्मा जी ने उत्तपन्न किए है वो पितरो के लिये सबसे उचित 

खाद्य पदार्थ माना जाता है ।

इसलिए माघ माह में तिल दान करने से पितरों को प्रशन्नता मिलती है ।

जो माघ माह में ब्राह्मण को तिल दान करता है उसे जीव जंतुओं से भरे नर्क के द्वार का दर्शन नहीं करता है ।


वैसे तो पूरे माघ माह में तिल दान करने की महिमा है पर कुछ 

तिथियों पर तिल दान करने की कोशिश करें :


  1. 06 फ़रवरी : षटतिला एकादशी 

  2. 09 फ़रवरी : अमावस्या

  3. 12 फ़रवरी : तिलकुंद चतुर्थी

  4. 13 फ़रवरी : विष्णुपदि संक्रांति 

  5. 16 फ़रवरी : सप्तमी

  6. 22 फ़रवरी : गुरुपुष्यामृत

  7. 24 फ़रवरी : माघी पूर्णिमा

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